As an Amazon Associate, we earn from qualifying purchases. You have nothing to pay extra

गोदान
Godan Summary in Hindi – गोदान – सम्पूर्ण सार (Rankman Special)
1. परिचय – Godan Introduction
पुस्तक – गोदान
लेखक – मुंशी प्रेमचंद (धनपत राय)
प्रकाशन – 1936 में, प्रेमचंद का आखिरी और सबसे बड़ा उपन्यास
कुल अध्याय – 36 अध्याय
शैली – महाकाव्यात्मक यथार्थवादी उपन्यास, किसान-महाकाव्य
भाषा – हिंदी
खास बात – हिंदी का सबसे बड़ा उपन्यास
2. मुख्य पात्र – Main Characters
क) होरी (नायक) – गरीब किसान, 5 बीघा का किसान, गोदान की इच्छा
ख) धनिया (नायिका) – होरी की पत्नी, तेज-तर्रार, सच्ची औरत
ग) गोबर – होरी-धनिया का बेटा, शहर जाता है, विद्रोही
घ) झुनिया – गोबर की पत्नी, विधवा, सबसे दुखी पात्र
ङ) रायसाहब अमरपाल सिंह – जमींदार, मीठा बोलता है पर शोषण करता है
च) पंडित दातादीन – ब्राह्मण, लालची, ब्याज पर पैसा देता है
छ) मातादीन – दातादीन का बेटा, सिलिया चमारिन से प्यार
ज) सिलिया – चमारिन, मातादीन की प्रेमिका
झ) मिस्टर मेहता – शहर का प्रोफेसर, आदर्शवादी
ञ) मिस मालती – डॉक्टर, मॉडर्न औरत, मेहता से प्यार
3. मूल विषय / कथावस्तु – Storyline
गांव में होरी है – गरीब किसान, उसके मन में एक ही इच्छा – एक गाय हो, गोदान कर सकूं।
होरी कर्ज लेकर एक गाय लाता है, पर भाई हीरा जलन में गाय को जहर दे देता है, गाय मर जाती है। पुलिस आती है, दरोगा को घूस देनी पड़ती है, कर्ज और बढ़ जाता है।
होरी का बेटा गोबर गांव की विधवा झुनिया को भगा लेता है, होरी को बिरादरी से बाहर कर दिया जाता है, जुर्माना लगता है। होरी फिर कर्ज लेता है।
गोबर शहर भाग जाता है, वहां मजदूर बनता है। शहर में मिस्टर मेहता और मिस मालती की कहानी चलती है – शहर भी गांव जैसा ही लालची है।
होरी जीवन भर कर्ज चुकाता है, अंत में मजदूरी करते-करते लू लगने से मर जाता है। मरते वक्त धनिया 20 आना पंडित दातादीन को देती है – यही होरी का गोदान है।
प्रेमचंद कहते हैं – किसान पैदा होता है कर्ज में, जीता है कर्ज में, मरता है कर्ज में।
मुंशी प्रेमचंद की अमर कृति गोदान – मूल पुस्तक*
मुंशी प्रेमचंद की अमर कृति गोदान – मूल पुस्तक*
सारांश में तो बस झलक है, असली दर्द तो पूरी किताब में है। अपने घर बैठे मंगवाएं।
[अमेज़न पर गोदान बुक देखें – सिर्फ ₹199]
4. गोदान के 10 प्रसिद्ध संवाद – Famous Dialogues
1. होरी – मेरे पास 5 बीघा जमीन है, मैं किसान हूं, भिखारी नहीं।
2. धनिया – कर्ज लेकर गाय लाए, अब कर्ज में ही मरेंगे।
3. गोदान – गाय तो मर गई, अब क्या गोदान करोगे?
4. दातादीन – ब्राह्मण को दान दो तभी मुक्ति मिलेगी।
5. होरी – हम गरीब हैं पर चोर नहीं।
6. गोबर – मैं शहर जाऊंगा, गांव में कुछ नहीं रखा।
7. मालती – मैं बाहर से मॉडर्न हूं, अंदर से भारतीय।
8. मेहता – औरत और किसान ही इस देश की आत्मा हैं।
9. सिलिया – मैं चमारिन हूं तो क्या प्यार नहीं कर सकती?
10. प्रेमचंद – किसान का जीवन ही गोदान है।

हजारों लोगों ने इस किताब को पढ़ा, आप भी आज ही अपनी कॉपी बुक करें।
[गोदान बुक अभी ऑर्डर करें – फ्री डिलीवरी]
5. अध्याय वाइज सार – 36 Chapter Wise Summary
अध्याय 1 – होरी की गोदान की इच्छा
होरी और धनिया में बात – एक गाय हो तो गोदान हो जाए।
अध्याय 2 – रायसाहब से भेंट
होरी रायसाहब के पास जाता है, रायसाहब मीठा बोलकर लगान बढ़ा देते हैं।
अध्याय 3 – भोला और गाय का सौदा
भोला अहीर से होरी गाय उधार लेता है – 80 रुपये में।
अध्याय 4 – गांव में खुशी
गाय आती है तो गांव में खुशी, धनिया पूजा करती है।
अध्याय 5 – हीरा की जलन
होरी का भाई हीरा जलता है और गाय को जहर दे देता है।
अध्याय 6 – गाय की मौत
गाय मर जाती है, होरी रोता है, गांव वाले शक करते हैं।
अध्याय 7 – पुलिस और दरोगा
पुलिस आती है, होरी को 30 रुपये घूस देने पड़ते हैं।
अध्याय 8 – कर्ज का बोझ
गाय गई, कर्ज बचा, होरी फिर से कंगाल।
अध्याय 9 – गोबर और झुनिया का प्यार
गोबर और विधवा झुनिया में प्यार होता है।
अध्याय 10 – झुनिया घर में आती है
झुनिया गर्भवती होकर होरी के घर आ जाती है।
अध्याय 11 – बिरादरी का जुर्माना
पंडित दातादीन और गांव वाले होरी पर 100 रुपये जुर्माना लगाते हैं।
अध्याय 12 – गोबर का भागना
डर से गोबर शहर भाग जाता है, झुनिया अकेली।
अध्याय 13 – धनिया का गुस्सा
धनिया झुनिया को पहले गाली देती है पर फिर अपना लेती है।
अध्याय 14 – शहर में मेहता-मालती
शहर में प्रोफेसर मेहता और डॉक्टर मालती की दोस्ती।
अध्याय 15 – रायसाहब की महफिल
रायसाहब के यहां शहर के बड़े लोग आते हैं, किसान पर बहस।
अध्याय 16 – गोबर शहर में मजदूर
गोबर शहर में मजदूर बनता है, 15 रुपये कमाता है।
अध्याय 17 – होरी फिर मजदूरी
कर्ज चुकाने के लिए होरी दूसरों के खेत में मजदूरी करता है।
अध्याय 18 – मातादीन और सिलिया
ब्राह्मण मातादीन और चमारिन सिलिया में प्यार, गांव में हल्ला।
अध्याय 19 – दातादीन का लालच
दातादीन होरी से ब्याज पर ब्याज वसूलता है।
अध्याय 20 – गोबर की वापसी
गोबर थोड़ा पैसा लेकर गांव वापस आता है, अकड़ दिखाता है।
अध्याय 21 – गोबर का घमंड
गोबर कहता है – मैं अब शहर का आदमी हूं।
अध्याय 22 – झुनिया और गोबर की शादी
गोबर और झुनिया की शादी होती है पर खुशी नहीं।
अध्याय 23 – मालती और मेहता में प्यार
शहर में मालती को मेहता से प्यार होने लगता है।
अध्याय 24 – होरी का फिर कर्ज
बेटे की शादी के लिए होरी फिर कर्ज लेता है।
अध्याय 25 – सिलिया का बच्चा
सिलिया को मातादीन से बच्चा होता है, मातादीन भाग जाता है।
अध्याय 26 – धनिया सिलिया को अपनाती है
धनिया सिलिया को भी घर में रख लेती है।
अध्याय 27 – गोबर फिर शहर
गोबर फिर शहर चला जाता है, झुनिया को छोड़कर।
अध्याय 28 – रायसाहब का चुनाव
रायसाहब चुनाव में खड़े होते हैं, किसानों से वोट मांगते हैं।
अध्याय 29 – होरी की बीमारी
होरी बीमार पड़ जाता है, पर फिर भी खेत जाता है।
अध्याय 30 – मेहता का गांव देखना
मेहता गांव आता है और होरी की हालत देखकर रो पड़ता है।
अध्याय 31 – गोबर की चिट्ठी
गोबर की चिट्ठी आती है – मैं शहर में फंस गया।
अध्याय 32 – लगान का दबाव
जमींदार लगान के लिए होरी को धमकाता है।
अध्याय 33 – होरी की आखिरी मजदूरी
होरी सड़क खोदने की मजदूरी करता है, लू लग जाती है।
अध्याय 34 – होरी का बिस्तर
होरी बिस्तर पर पड़ जाता है, धनिया रोती है।
अध्याय 35 – पंडित दातादीन फिर आता है
मरते हुए होरी से भी दातादीन गोदान मांगता है।
अध्याय 36 – अंतिम गोदान – होरी की मौत
होरी मर जाता है, धनिया 20 आना जो मजदूरी से बचाए थे, दातादीन को देती है – यही होरी का गोदान है। गांव वाले रोते हैं।
निष्कर्ष – Conclusion
प्रेमचंद कहते हैं – होरी कोई एक किसान नहीं, पूरा भारत है। उसका गोदान गाय का नहीं, जीवन का है। किसान पैदा होता है कर्ज में, मरता है कर्ज में। यही गोदान है।
जय गोदान, जय होरी!
खास ऑफर – आज ही ऑर्डर करें!
हजारों लोगों ने इस किताब को पढ़कर अपनी जिंदगी बदली है। आप भी आज ही अपनी कॉपी बुक करें।
मूल्य: सिर्फ ₹199 | फ्री डिलीवरी | कैश ऑन डिलीवरी उपलब्ध
As an Amazon Associate, we earn from qualifying purchases. You have nothing to pay extra
