Mai Nastik Kyu Hu Summary in Hindi – मैं नास्तिक क्यों हूँ – सम्पूर्ण सार (Rankman Special)

अगर आप Google पर इस किताब की हिंदी समरी खोजते-खोजते यहाँ आए हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। इंटरनेट पर इस किताब के बारे में बहुत कुछ लिखा है पर सब अंग्रेजी में है। इसलिए मैं आपके लिए इसका पूरा सार हिंदी में लेकर आया हूँ, जिसे आप 10 मिनट में पढ़कर पूरी किताब का ज्ञान ले सकते हैं।

1. परिचय – Mai Nastik Kyu Hu Introduction

पुस्तक – मैं नास्तिक क्यों हूँ (Why I am an Atheist)

लेखक – शहीद-ए-आजम भगत सिंह

लेखन – 6-7 अक्टूबर 1930, लाहौर सेंट्रल जेल में

प्रकाशन – 27 सितंबर 1931 को Lala Lajpat Rai की बेटी के अखबार ‘The People’ में

कुल पृष्ठ – 20 पेज का लेख, 1 ही बैठक में लिखा गया

भाषा – मूल अंग्रेजी, बाद में हिंदी अनुवाद

खास बात – जेल में भगत सिंह के दोस्त बाबा रंधावा ने कहा था – तू घमंडी हो गया है इसलिए ईश्वर को नहीं मानता, उसी के जवाब में ये लिखा था।

2. मुख्य पात्र – Main Characters

इसमें कहानी के पात्र नहीं, विचारों के पात्र हैं।

क) भगत सिंह (नायक) – 23 साल का नौजवान जो फांसी से 5 महीने पहले कहता है मैं नास्तिक हूं

ख) बाबा रंधावा सिंह (सवाल पूछने वाला) – धार्मिक क्रांतिकारी जो कहता है – तू घमंड में आकर नास्तिक बना है

ग) ईश्वर (कटघरे में खड़ा पात्र) – जिस पर भगत सिंह केस चलाते हैं – तू है तो गरीब क्यों भूखा है?

घ) धर्म – जो भगत सिंह के अनुसार इंसान को डरपोक बनाता है

ङ) अहंकार (घमंड) – जिस पर भगत सिंह कहते हैं – मेरा नास्तिक होना घमंड नहीं, सोच है

3. मूल विषय / कथावस्तु – Storyline

भगत सिंह से पूछा गया – तुम भगवान को क्यों नहीं मानते? क्या तुम घमंडी हो गए हो?

भगत सिंह कहते हैं – नहीं, मैं घमंडी नहीं, मैं सोचने वाला हूं।

मैंने बचपन में भगवान को माना। फिर मैंने देखा – दुनिया में गरीब भूखा मर रहा है, अंग्रेज हमें कोड़े मार रहे हैं और भगवान चुप है। अगर भगवान है तो वो अंग्रेजों का साथ क्यों दे रहा है?

धर्म कहता है – सब भगवान की मर्जी है, चुपचाप सहो। मैं कहता हूं – नहीं, ये भगवान की मर्जी नहीं, ये अन्याय है।

मैं नास्तिक इसलिए हूं क्योंकि मैं इंसान पर भरोसा करता हूं भगवान पर नहीं। मैं चाहता हूं मनुष्य खुद अपनी किस्मत बनाए, भगवान के भरोसे न रहे।

नास्तिक होना मेरे लिए गर्व है क्योंकि ये मुझे कमजोर नहीं, ताकतवर बनाता है।

4. मैं नास्तिक क्यों हूँ के 10 प्रसिद्ध विचार – Famous Quotes

1. मैं नास्तिक इसलिए नहीं कि मैं घमंडी हूं, मैं नास्तिक इसलिए हूं क्योंकि मैं सोचता हूं।

2. ईश्वर की कल्पना ने इंसान को डरपोक बना दिया है।

3. अगर ईश्वर है तो उसने दुनिया में गरीबी और गुलामी क्यों बनाई?

4. धर्म ने इंसान को भाग्यवादी बना दिया – सब भगवान की मर्जी है।

5. मैं किसी चमत्कार पर विश्वास नहीं करता, मैं मेहनत पर विश्वास करता हूं।

6. अहंकार नहीं, तर्क मुझे नास्तिक बनाता है।

7. जो इंसान भगवान पर भरोसा करता है वो खुद पर भरोसा करना छोड़ देता है।

8. नास्तिक वो है जो खुद को कर्ता मानता है, आस्तिक वो है जो भगवान को कर्ता मानता है।

9. मेरी नास्तिकता मुझे मौत से नहीं डराती, मुझे लड़ना सिखाती है।

10. जब तक मनुष्य भगवान के भरोसे रहेगा तब तक गुलाम रहेगा।

5. अध्याय वाइज सार और निष्कर्ष – Chapter Wise Summary

अध्याय 1 – आरोप – तुम घमंडी हो गए हो

बाबा रंधावा ने कहा – तू नास्तिक इसलिए बना है क्योंकि तू HSRA का नेता बन गया है और तुझे घमंड आ गया है।

अध्याय 2 – क्या मैं घमंडी हूं?

भगत सिंह जवाब देते हैं – अगर घमंड होता तो मैं कांग्रेस में बड़ा नेता बन जाता, मैं फांसी क्यों चुनता? घमंड नहीं है।

अध्याय 3 – बचपन में मैं आस्तिक था

मैं भी आर्य समाजी था, रोज गायत्री मंत्र पढ़ता था, भगवान को मानता था।

अध्याय 4 – ईश्वर पर पहला शक

फिर मैंने देखा – अंग्रेज हमें मार रहे हैं, गरीब भूखे मर रहे हैं, फिर भगवान क्यों नहीं आता? तभी शक पैदा हुआ।

अध्याय 5 – धर्म की असलियत

मैंने धर्म की किताबें पढ़ीं – धर्म कहता है चुप रहो, सब भगवान करेगा। यही सोच ने हमें गुलाम बनाया।

अध्याय 6 – ईश्वर है तो अन्याय क्यों है?

अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो दुनिया में इतना जुल्म क्यों है? वो रोकता क्यों नहीं? इसलिए ईश्वर नहीं है।

अध्याय 7 – नास्तिक होने का गर्व

मैं नास्तिक हूं तो मुझे मौत से डर नहीं लगता। मैं जानता हूं मेरी मौत के बाद कुछ नहीं है, इसलिए मैं जिंदगी को पूरी तरह जी रहा हूं।

निष्कर्ष – Conclusion

भगत सिंह कहते हैं – मैं नास्तिक इसलिए हूं क्योंकि मैं स्वतंत्र होना चाहता हूं। मैं चाहता हूं इंसान भगवान के भरोसे न रहे, अपने पैरों पर खड़े हो। ईश्वर को मारने से ही इंसान आजाद होगा। मेरी मौत मेरे नास्तिक होने का सबूत होगी।

इंकलाब जिंदाबाद!

मैंने इस समरी को अपने खुद के शब्दों में लिखा है, किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी नहीं किया है। फिर भी हो सकता है कि किताब के किसी पॉइंट को समझने में मुझसे कोई चूक हो गई हो। अगर आपको लगता है कि कहीं पर मैंने कुछ गलत समझा दिया है या गलत लिख दिया है, तो प्लीज मुझे कमेंट बॉक्स में बता दीजिए। मैं आपकी बात का पूरा सम्मान करूंगा और लेख में सुधार कर दूंगा।

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