Dehati Duniya Summary in Hindi – Shivpujan Sahay | Kahani, Patra aur Seekh

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Dehati Duniya Summary in Hindi me aapka swagat hai. Ye Hindi ka pehla anchalik upanyas hai.

Dehati Duniya Summary - Zamindar atyachar aur gaon me jhad phook ka drishya

दोस्तों, आज हम एक ऐसी किताब के बारे में बात करने वाले हैं जिसे पढ़कर मेरी खुद की सोच बदल गई थी। बिहार के गाँवों का असली रूप क्या होता है, ये इसी किताब में दिखता है। स्कूल-कॉलेज में तो हम सार पढ़ लेते हैं पर इसका असली मतलब बहुत गहरा है। तो चलिए बिना टाइम खराब किये शुरू करते हैं।

1. Dehati Duniya Summary in Hindi – Lekhak Parichay

देहाती दुनिया आचार्य शिवपूजन सहाय द्वारा 1926 में लिखा गया एक आंचलिक उपन्यास है। आंचलिक का मतलब होता है – किसी एक अंचल यानी इलाके की कहानी।

यह हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास माना जाता है। इसमें 1920 के बिहार के एक छोटे से गाँव की कहानी है। उस समय अंग्रेजों का राज था, जमींदारों का अत्याचार था, और गाँव के लोग अंधविश्वास में डूबे थे। शिवपूजन सहाय ने खुद गाँव में रहकर जो देखा, वही इसमें लिख दिया।

इसलिए इसे पढ़ने पर लगता है जैसे हम खुद उस गाँव में घूम रहे हों।

2. मुख्य पात्र (Main Characters)

बाबू शिवपूजन (लेखक खुद):* कहानी को वही सुनाते हैं। वह शहर से गाँव में मास्टर बनकर आते हैं।

मुखिया जी: गाँव के मुखिया, जो दिखावे के लिए भले हैं पर अंदर से जमींदारों के साथ मिले हैं।

रमेसर: गाँव का एक गरीब किसान, जो बहुत मेहनती है पर कर्ज में डूबा है।

बुधिया: रमेसर की पत्नी गाँव की सीधी-सादी औरत।

जमींदार: कहानी का खलनायक, जो किसानों से जबरन लगान वसूलता है।

गाँव के लोग: पंडित, नाई, धोबी, चमार – ये सब मिलकर ही देहाती दुनिया बनाते हैं।

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3. पूरी कहानी का सार (Detailed Story)

कहानी बिहार के आरा जिले के एक छोटे से गाँव से शुरू होती है। लेखक शिवपूजन खुद उस गाँव में प्राइमरी स्कूल के मास्टर बनकर आते हैं।

गाँव में आते ही वह देखते हैं कि गाँव में 4 चीजें बहुत हैं – गरीबी, अंधविश्वास, झगड़ा और मुकदमा।

गाँव में दो तरह के लोग हैं। एक तरफ जमींदार और उसके आदमी हैं जो बिना काम किये मौज करते हैं। दूसरी तरफ रमेसर जैसे गरीब किसान हैं जो दिन भर खेत में काम करते हैं, फिर भी भरपेट खाना नहीं खा पाते।

कहानी में कोई एक हीरो नहीं है, पूरा गाँव ही हीरो है। लेखक एक-एक करके गाँव की घटनाएं बताते हैं।

एक दिन गाँव में चोरी हो जाती है तो सारा इल्जाम गरीबों पर लगा दिया जाता है। एक दिन किसी के घर बच्चा बीमार होता है तो डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय ओझा-गुनी को बुलाया जाता है।

रमेसर की कहानी सबसे दुखी करने वाली है। वह अपनी बेटी की शादी के लिए जमींदार से 50 रुपये कर्ज लेता है। बदले में जमींदार उसका खेत लिखवा लेता है। रमेसर दिन-रात मेहनत करके भी कर्ज नहीं चुका पाता और अंत में उसका खेत नीलाम हो जाता है।

लेखक देखते हैं कि गाँव के लोग आपस में ही लड़ते रहते हैं। भाई-भाई में जमीन के लिए मुकदमा चल रहा है। पंचायत में न्याय नहीं, बल्कि पैसे वाले की जीत होती है।

अंत में लेखक बहुत दुखी होकर गाँव छोड़ देते हैं। वह लिखते हैं – “देहाती दुनिया बाहर से जितनी सुंदर दिखती है, अंदर से उतनी ही दुखी है।”

    Dehati Duniya Summary in Hindi

4. मुख्य संदेश और समीक्षा (Theme & Review)

इस किताब के 3 बड़े संदेश हैं।

1. जमींदारी प्रथा का सच:

1920 में अंग्रेजों के साथ मिलकर जमींदार किसानों को कैसे लूटते थे, यह इस किताब में साफ दिखता है। आज भी कई जगह ऐसा ही होता है।

2. अंधविश्वास:

गाँव के लोग बीमारी को भूत-प्रेत समझते हैं। पढ़ाई की कमी से कैसे गाँव पीछे रह जाता है, यह भी दिखाया गया है।

3. आंचलिकता की शुरुआत:

हिंदी साहित्य में गाँव की बोली, गाँव के शब्द, गाँव के रीति-रिवाज को पहली बार इतने अच्छे से इसी किताब में दिखाया गया। बाद में फणीश्वरनाथ रेणु ने मैला आँचल इसी से प्रेरित होकर लिखा।

मेरी राय में अगर आप बिहार से हैं या गाँव से जुड़े हैं, तो आपको यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए। यह सिर्फ कहानी नहीं, 100 साल पुराने बिहार का सच्चा इतिहास है।

5. निष्कर्ष (Conclusion)

देहाती दुनिया हमें सिखाती है कि भारत गाँवों में बसता है, पर गाँवों की हालत आज भी वैसी ही है। जब तक गाँव में शिक्षा और न्याय नहीं आएगा, तब तक रमेसर जैसे किसान मरते रहेंगे।

शिवपूजन सहाय ने 100 साल पहले जो लिखा था, वह आज भी सच है। इसलिए यह किताब आज भी पढ़ने लायक है।

दोस्तों, कैसी लगी आपको देहाती दुनिया की ये सारांश? उम्मीद करता हूँ आपको सब कुछ अच्छे से समझ आ गया होगा। अगर आपको हमारा ये लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो बिहार बोर्ड में पढ़ रहे हैं। और हाँ, अगली कौन सी किताब का सार चाहिए, नीचे कमेंट में जरूर बताना।

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